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Showing posts from July, 2020

श्रावण मास पुत्रदा एकादशी

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श्रावण मास पुत्रदा एकादशी श्रावण मास में आने वाली पुत्रदा एकादशी संतान कामना को पूरा करने वाली होती है. इस दिन व्रत रखने का खास महत्‍व है. कहा गया है कि इस दिन व्रती को एकादशी कथा जरूर पढ़नी चाहिए I इसके सुनने मात्र से ही वायपेयी यज्ञ का फल मिलता है। श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा श्री पद्मपुराण के अनुसार द्वापर युग में महिष्मतीपुरी का राजा महीजित बड़ा ही शांति एवं धर्म प्रिय था ।  लेकिन वह पुत्र-विहीन था । राजा के शुभचिंतकों ने यह बात महामुनि लोमेश को बताई तो उन्होंने बताया कि राजन पूर्व जन्म में एक अत्याचारी , धनहीन वैश्य थे ।  इसी एकादशी के दिन दोपहर के समय वे प्यास से व्याकुल होकर एक जलाशय पर पहुंचे , तो वहां गर्मी से पीड़ित एक प्यासी गाय को पानी पीते देखकर उन्होंने उसे रोक दिया और स्वयं पानी पीने लगे ।  राजा का ऐसा करना धर्म के अनुरूप नहीं था । अपने पूर्व जन्म के पुण्य कर्मों के फलस्वरूप वे अगले जन्म में राजा तो बने , किंतु उस एक पाप के कारण संतान विहीन हैं. महामुनि ने बताया कि राजा के सभी शुभचिंतक यदि श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को विधि पूर्वक व्रत क...

आइये जानते है श्रावण मास में बाबा बर्फानी अमरनाथ की अमर कथा

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                              अमरनाथ की अमर कथा एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से पूछा , ऐसा क्यों है कि आप अजर हैं , अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर , फिर से बरसों तप के बाद आपको प्राप्त करना होता है । जब मुझे आपको पाना है तो मेरी तपस्या और इतनी कठिन परीक्षा क्यों ? आपके कंठ में पडी़ नरमुंड माला और अमर होने के रहस्य क्या हैं ? महादेव ने पहले तो देवी पार्वती के उन सवालों का जवाब देना उचित नहीं समझा , लेकिन पत्नीहठ के कारण कुछ गूढ़ रहस्य उन्हें बताने पडे़। शिव महापुराण में मृत्यु से लेकर अजर-अमर तक के कर्इ प्रसंग हैं , जिनमें एक साधना से जुडी अमरकथा बडी रोचक है। जिसे भक्तजन अमरत्व की कथा के रूप में जानते हैं। हर वर्ष हिम के आलय (हिमालय) में अमरनाथ , कैलाश और मानसरोवर तीर्थस्थलों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सैकड़ों किमी की पैदल यात्रा करते हैं , क्यों ? यह विश्वास यूं ही नहीं उपजा। शिव के प्रिय अधिकमास , अथवा आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण मास तक की पूर्णिमा के बी...

आखिर क्यों खास है नागपंचमी, क्यों मनाई जाती है नागपंचमी जानिए

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                                                                      नागपंचमी के त्योहार की महिमा पौराणिक कथा के अनुसार आज के दिन सृष्टि के रचियता ब्रह्मा जि ने शेषनाग को अलंकृत किया था और उंको सम्पुर्ण पृथ्वी का भार उठाने का ज़िम्मा दिया था और इस वजह से नाग देवता को पाताल लोक का स्वामी माना जाता है। सांप सिर्फ भगवान शिव के गले का आभूषण ही नहीं है बल्कि भगवान विष्णु भी शेषनाग पर लेटे रहते हैं। हिंदू धर्म में सांपों को दैवीय जीव माना जाता है। यही कारण है कि अन्य देवी देवताओं के साथ ही लोग नाग देवता की भी पूजा करते हैं। प्रत्येक वर्ष सावन के महीने में नागपंचमी को त्योहार के रुप में मनाया जाता है। इस दिन विशेष रुप से सर्पों की पूजा की जाती है और उन्हें दूध चढ़ाया जाता है। नागपंचमी का त्योहार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। समुद्र मंथन से निकले विष को जब भगवान शंक...

भगवान कृष्ण और अरिष्टासुर कथा

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आखिर किस कारण एक शिष्य को बैल का जन्म  लेना पडा    भगवान कृष्ण और अरिष्टासुर कथा   एक बार वृंदावन में एक बड़ा बैल घुस गया और उसने अचानक से गांव के लोगों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया। उस बैल ने कई लोगों के घर को तोड़ दिया जिसके कारण कई लोगों को चोट भी लगी। जब कृष्ण को इस बात का पता चला तो वह तुरंत उस बैल के पास पहुंचे। श्रीकृष्ण ने देखते ही पता लगा लिया कि वह बैल एक असुर है। उस असुर का नाम था अरिष्ठासुर है। कृष्ण को देखते ही वह कृष्ण की ओर तेजी से आक्रमण करने के लिए दौड़ा। भगवान कृष्ण ने अपनी शक्ति से उसे परास्त कर दिया। परास्त करते ही वह बैल भगवान कृष्ण के समक्ष नतमस्तक होकर बैठ गया। उसके बाद उसने कृष्ण को बताया कि वह भगवान बृहस्पति का शिष्य है और अपने गुरु के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण उसे असुर बैल बनने का श्राप मिला था। इस प्रकार कृष्ण में ब्रज के लोगों को अरिष्ठासुर से बचाया। महात्म : जैसी जैसी भावना वैसा ही फल दे , गुरु से कभी भी विरोध नहीं करना चाहिये I जय श्री कृष्ण I शिव शक्ति धाम

कामिका एकदशी व्रत कथा एवम महिमा

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कामिका एकदशी व्रत कथा एवम महिमा   श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी , वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है , उसका क्या नाम है ? क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है , सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख , चक्र , गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन होता है , जिनके नाम श्रीधर , हरि , विष्णु , माधव , मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा , काशी , नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है , वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से , समुद्र , वन सहित पृथ्वी दान करने से , सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं...

श्रावण मास की महिमा

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श्रावण मास की महिमा हिंदू पंचांग का आरंभ चैत्र मास से होता है। चैत्र मास से पाँचवा माह श्रावण मास होता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार इस मास की पूर्णिमा के दिन आकाश में श्रवण नक्षत्र का योग बनता है। इसलिए श्रवण नक्षत्र के नाम से इस माह का नाम श्रावण हुआ। इस माह से चातुर्मास की शुरुआत होती है। यह माह चातुर्मास के चार महीनों में बहुत शुभ माह माना जाता है। श्रावण का अर्थ : श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है सुनना। अर्थात सुनकर धर्म को समझना। वेदों को श्रुति कहा जाता है अर्थात उस ज्ञान को ईश्वर से सुनकर ऋषियों ने लोगों को सुनाया था। श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव इस माह में सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. हिंदू धर्म में सावन के महीने का बहुत महत्व है. श्रावण मास में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है. इसे मनोकामनाओं को पूरा करने का महीना भी कहा जाता है. श्रावण मास को वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना...

Guru Purnima

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Guru Purnima   Teacher’s Day we are well aware with this event, as we all know, in India we celebrate Teachers day on 5 September birth anniversary of very a scholar & pionior of our education Dr. Sarvapalli Radhakrishnan Oct 5 th 1994 we started celebrating Teacher’s day internationally & in India from the year 1962.   We have many a times heard about Gurupurnima But do we acutally know why do we celebrate Gurupurnima, why it is so important why do we celebrate this day? As I remember one the famous quote or doha of Saint Kabir Das which I would like to share गुरू गोविन्द दोऊ खड़े , काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।। कबीर इस दोहे मे कहते हैं कि अगर हमारे सामने गुरु और भगवान दोनों एक साथ खड़े हों तो आप किसके चरण स्पर्श करेंगे ? इस पर वो कहते हैं गुरु ही हमारा आदर , सम्मान और स्नेह के हैं क्योंकि उनके ज्ञान से ही हमें   भगवान से मिलने का रास्ता मिलता है ।   इसलिए ग...