शीतला सप्तमी की कथा
देश के तमाम हिस्सों में महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ शीतला सप्तमी मनाई जाती है। घरों को शुद्ध और पवित्र करते हुए एक रात पहले तैयार किये गए ठंडे खाने का भोग लेकर महिलाएं प्रातः काल से ही शीतला माता मंदिर में पहुंचने लगती है। महिलाओं में शीतला माता की पूजा अर्चना को लेकर काफी उल्लास देखा जाता है। पूजा अर्चना के दौरान महिलाओं द्वारा 'हृं श्रीं शीतलायै नमः' मंत्र का मन में उच्चारण किया गया।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ शीतला को ठन्डे भोजन का भोग इसी मान्यता के अनुरूप लगाया जाता है। कथा इस प्रकार है.... एक बार शीतला सप्तमी के दिन एक परिवार में बूढ़ी औरत और उनकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा। मान्यता के अनुसार इस दिन सिर्फ बासी भोजन ही खाया जाता है, इसी वजह से रात को ही माता का भोग सहित अपने लिए भी भोजन बना लिया। लेकिन बूढ़ी औरत की दोनों बहुओं ने ताज़ा खाना बनाकर खा लिया। क्योंकि हाल ही में उन दोनों को संतान हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना करे। यह बात उनकी सास को मालूम चली कि दोनों ने ताज़ा खाना खा लिया, इस बात को जान वह नाराज हुई। थोड़ी देर बा...