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Showing posts from May, 2021

मोहिनी एकादशी

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मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को राक्षसों से बचाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था। इसलिए इस दिन भगवान श्रीहरि के मोहिनी स्वरूप की पूजा का विधान है। लोगों के बीच आस्था है कि मोहिनी एकादशी का व्रत व पूजन करने से व्यक्ति के पापों का अंत होता है। भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होने की भी मान्यता है।  मोहिनी एकादशी पूजा विधि- एकादशी के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद साफ वस्‍त्र धारण करके एकादशी व्रत का संकल्‍प लें।  - उसके बाद घर के मंदिर में पूजा करने से पहले एक वेदी बनाकर उस पर 7 धान (उड़द, मूंग, गेहूं, चना, जौ, चावल और बाजरा) रखें।  - वेदी के ऊपर एक कलश की स्‍थापना करें और उसमें आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं।  - अब वेदी पर भगवान विष्‍णु की मूर्ति या तस्‍वीर रखें।  - इसके बाद भगवान विष्‍णु को पीले फूल, ऋतुफल और तुलसी दल समर्पित करें।  - फिर धूप-दीप से विष्‍णु की आरती उतारें।  - शाम के समय भगवान विष्‍णु की आरती उतार...

अक्षय तृतीया

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अक्षय तृतीया अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचागं देखने की जरूरत नहीं है। अक्षय तृतीया पर किए गए कार्यों का कई गुना फल प्राप्‍त होता है। इसे अखतीज के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों में बताया गया है कि यह बहुत ही पुण्यदायी तिथि है इसदिन किए गए दान पुण्य के बारे में मान्यता है कि जो कुछ भी पुण्यकार्य इस दिन किए जाते हैं उनका फल अक्षय होता है यानी कई जन्मों तक इसका लाभ मिलता है। अक्षय तृतीया का क्या है महत्व? अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य करने का विशेष महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन कम से कम एक गरीब को अपने घर बुलाकर सत्‍कार पूर्वक उन्‍हें भोजन अवश्‍य कराना चाहिए। गृहस्‍थ लोगों के लिए ऐसा करना जरूरी बताया गया है। मान्‍यता है कि ऐसा करने से उनके घर में धन धान्‍य में अक्षय बढ़ोतरी होती है। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हमें धार्मिक कार्यों के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्‍सा दान करना चाहिए। ऐसा करने से हमारी धन और संपत्ति में कई गुना इजाफा होता है। क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया? हिंदू धर्म में अक्ष...

वरुथिनी एकादशी

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वरूथिनी एकादशी व्रत वैसे तो हर माह में एकादशी तिथि होती है और सबका अपना-अपना महत्व भी है, लेकिन भगवान विष्णु जी के प्रिय वैशाख महीने की वरूथिनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान के वराह अवतार का पूजन करने वालों की सभी कामनाएं पूरी होने लगती है। इस दिन दान पुण्य करने से वाले लोगों को भगवान विष्णु के परम धाम की प्राप्ति होती है। सभी एकादशी तिथियों में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी बेहद खास मानी जाती है, जिसे वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। वरूथिनी एकादशी के व्रत से समस्त पाप, ताप नष्ट होने के साथ सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वरूथिनी एकादशी का व्रत अथाह पुण्य फल प्रदान करने वाला माना जाता है। वरुथिनी एकादशी व्रत कथा वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व धार्मिक पौराणिक ग्रंथों में विस्तार से मिलता है। वरुथिनी एकादशी के बारे में कथा इस प्रकार है- बहुत समय पहले की बात है, माँ नर्मदा नदी के किनारे एक राज्य था जिसका राजा मांधाता था। राजा बहुत ही पुण्यात्मा थे, अपनी दानशीलता के लिये वे दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे, वे तपस्वी भी और भगवान विष्णु के अनन्य उपासक थे। एक बार राजा जंगल में तपस्या के लिय...