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Showing posts from April, 2021

महावीर हनुमान जयंती

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महावीर हनुमान जयंती हनुमान जयंती एक हिन्दू पर्व है। यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ माना जाता है। हनुमान जी को कलयुग में सबसे प्रभावशाली देवताओं में से एक माना जाता है। हनुमान जयन्ती को लोग हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए जाते है। कुछ लोग व्रत भी धारण कर बड़ी उत्सुकता और जोश के साथ समर्पित होकर इनकी पूजा करते है। चूँकि यह कहा जाता है कि ये बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए इन्हे जनेऊ भी पहनाई जाती है। हनुमानजी की मूर्तियों पर सिंदूर और चांदी का वर्क चढाने की परम्परा है। कहा जाता है राम की लम्बी उम्र के लिए एक बार हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर चढ़ा लिया था और इसी कारण उन्हें और उनके भक्तो को सिंदूर चढ़ाना बहूत अच्छा लगता है जिसे चोला कहते है। हर साल चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। हनुमान जी को कैसे करें खुश हनुमान जी को प्रसन्न करने का प्रमुख उपाय है अपने घर में नित्यप्रति राम नाम का गुणगान करते रहना। राम भक्तों की रक्षा करने के लिए हनुमान सदैव तत्पर रहते हैं। इन्होंने सभी नौ ग्रहों को राक्षस राज रावण से मुक्त कराया था जिसके फलस्वरू...

कामदा एकादशी

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कामदा एकादशी कामदा एकादशी व्रत कथा यह कथा भोगीपुर नाम के एक नगर की है, जिसके राजा थे पुण्डरीक। भोगीपुर नगर में अप्सरा, किन्नर तथा गंधर्व रहते थे। इसी नगर में अत्यंत वैभवशाली स्त्री पुरुष ललिता और ललित रहते थे ।उन दोनों के बीच इतना स्नेह था कि वह कुछ देर के लिए भी एक दूसरे से अलग नहीं रह पाते थे। ललित राजा के दरबार में एक दिन गंधर्वों के साथ गान करने पहुंचा। लेकिन गाते-गाते उसे ललिता की याद आ गई और उसका सुर बिगड़ गया। इस पर क्रोधित राजा पुण्डरीक ने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया और उसी क्षण ललित विशालकाय राक्षस बन गया। उसका शरीर आठ योजन का हो गया। उसकी पत्नी ललिता को इस बारे में खबर मिली तो वह बहुत दुखी हो गई और कोई रास्ता निकालने की कोशिश करने लगी। पति के पीछे-पीछे घूमती ललिता विन्ध्याचल पर्वत जा पहुंची। वहां उसे श्रृंगी ऋषि मिले। ललिता ने सारा हाल बताया और श्रृंगी ऋषि से कुछ उपाय बताने का आग्रह किया। श्रृंगी ऋषि ने ललिता को कहा कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी, जिसका नाम कामदा एकादशी है। इसका व्रत करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध होते हैं। यदि तू कामदा एकादशी क...

श्री राम नवमी

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श्री राम नवमी • राम नवमी पूजा विधि रामनवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्‍नान करने के बाद पीले स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और व्रत करने का संकल्‍प करें। घर के पूजा स्‍थल में पूजा से जुड़ी सभी सामग्री लेकर बैठें। विष्‍णु अवतार होने के कारण भगवान राम की पूजा में तुलसी और कमल का फूल अनिवार्य माना जाता है। घर के पूजा स्‍थल में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर राम दरबार की तस्‍वीर या फिर मूर्ति स्‍थापित करें। पूजा आरंभ करने के लिए भगवान की प्रतिमा पर सबसे पहले गंगाजल से छीटें दें। तांबे का कलश चावल के ढेर पर रखें और उस पर चौमुखी दीया जलाकर रखें। • रामलला को झुलाएं झूला रामनवमी के दिन कुछ लोग बाजार से छोटा सा पालना लाकर रामलला की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं। इसको करने के बाद भगवान राम की आरती करें। फिर चाहें तो विष्‍णु सहस्‍त्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं। भगवान राम को खीर, फल और मिष्‍ठान का भोग लगाएं। • इसलिए मनाते हैं राम नवमी हिंदू धर्म ग्रथों में भगवान राम और उनके तीनों भ्राताओं के जन्‍म को लेकर एक पौराणिक कथा बताई गई है। इसके अनुसार राजा दशरथ की तीनों रानियों कौशल्‍या, सुमित्रा और कैकयी में ...

चैत्र नवरात्रि महिमा

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चैत्र नवरात्रि हिन्दू धर्म में नवरात्रि का पर्व काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। एक वर्ष में कुल चार बार नवरात्रि का पर्व आता है परन्तु इनमें से माघ और आषाढ़ नवरात्रि गुप्त नवरात्रि होती है। इनके अलावा चैत्र तथा आश्विन नवरात्रि वह दो नवरात्रि हैं, जिनका हिंदू धर्म में सबसे अधिक महत्व है। चैत्र नवरात्रि के वसंत ऋतु में मनाये जाने के कारण इसे ‘वासंती नवरात्र’ भी कहते हैं। इसके साथ ही इस पर्व का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है। माँ दुर्गा को समर्पित चैत्र नवरात्रि के इस पर्व को मनाने का एक अलग ही तरीका है, जो इसे अन्य त्योंहारों से भिन्न बनाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हिमांचल प्रदेश, हरियाणा जैसे भारत के उत्तरी राज्यों में यह पर्व काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। एक वर्ष दो प्रमुख नवरात्रियां मनायी जाती है, शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि। नवरात्रि के इस पर्व को पूरे भारत भर में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। एक प्रमुख मान्यता के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही माँ दुर्गा का जन्म हुआ था और उनके क...

पापमोचिनी एकादशी

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पापमोचिनी एकादशी पापमोचिनी एकादशी महत्व शास्त्रों में बताया गया है कि पापमोचिनी एकादशी व्रत को करने से ग्रहों का अशुभ प्रभाव दूर किया जा सकता है। इसके साथ ही चंद्रमा भी जातक को शुभ फल प्रदान करता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को एकादशी का दिन प्रिय है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि इस व्रत को रखने वालों को संसार के सभी सुख प्राप्त होते हैं। पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान कृष्ण ने स्वंय पांडु पुत्र अर्जुन को पापमोचिनी एकादशी व्रत का महत्व बताया था। कहा जाता है राजा मांधाता ने लोमश ऋषि से जब पूछा कि अनजाने में हुए पापों से मुक्ति कैसे हासिल की जाती है? तब लोमश ऋषि ने पापमोचनी एकादशी व्रत का जिक्र करते हुए राजा को एक पौराणिक कथा सुनाई थी। कथा के अनुसार, एक बार च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी वन में तपस्या कर रहे थे। उस समय मंजुघोषा नाम की अप्सरा वहां से गुजर रही थी। तभी उस अप्सरा की नजर मेधावी पर पड़ी और वह मेधावी पर मोहित हो गईं। इसके बाद अप्सरा ने मेधावी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ढेरों जतन किए। मंजुघोषा को ऐसा ...