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Showing posts from September, 2020

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों  में से एक ज्योतिर्लिंग नागेश्वर है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से तीन मंदिर प्रसिद्ध हैं। पहला गुजरात के द्वारका में, दूसरा उत्तराखंड के अल्मोड़ा में और तीसरा महारष्ट्र के हिंगोली में स्थित है। नागेश्वर का मतलब नागों के ईश्वर से है , इसीलिए विष आदि के बचाव के लिए लोग यहाँ आते हैं। शास्त्रों में इस ज्योतिर्लिंग की महिमा की चर्चा की गयी है। काफी दूर-दूर से लोग यहाँ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं। इसी मंदिर परिसर में भगवान शिव जी की अति विशाल पद्मासन मुद्रा में प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा 125 फ़ीट ऊँची है और 25 फ़ीट चौड़ी है। मंदिर के अंदर तलघर में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है। यह एक अदभुत तीर्थस्थल है और इसकी कथा भी अद्वितीय है। आईये इस कथा को विस्तार से जानते हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कथा एक बार की बात है, दारुका नाम की राक्षसनी अपने राक्षस पति दारुक के साथ जंगल में रहती थी। माँ पार्वती ने दारुका को वरदान दिया था कि तुम इस वन को अपने साथ कहीं भी ले जा सकती हो। उसने व उसके पति ने पूरे वन में उथल-पुथल मचा राखी...

पुरषोत्तम मास कमला एकादशी / पद्मिनी एकादशी

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पुरषोत्तम मास कमला एकादशी / पद्मिनी एकादशी पद्मिनी एकादशी या कमला एकादशी की पौराणिक कहानी भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से कहा कि हे जनार्दन मुझे मलमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी के बारे में विस्तृत से बताएं और उसकी विधि समझाने की कृपा करें। भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि मलमास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है। साल में वैसे तो प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन जब मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। मलमास के महीने में दो एकादशियां होती हैं. जो पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष) और परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष) के नाम से जानी जाती हैं। पद्मिनी एकादशी का व्रत मनुष्‍यों के लिए दुर्लभ है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की कथा बताई थी। हे मुनिवर! पूर्वकाल में त्रेयायुग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी में राज्य करता था। उस राजा की 1,000 परम प्रिय स्त्रियां थीं, परंतु उनमें से किसी को भी पुत्र नहीं था, जो कि उनके राज्यभार को संभाल सके। देव‍ता, पितृ, सिद्ध तथा अने...

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग

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श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग, रामेश्वर ज्योतिर्लिंग है। इसे श्री रामलिंगेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है। यह मंदिर अपनी कलाकृति और शिल्पकला के लिए जाना जाता है। यह मंदिर काफी विशाल है। रामेश्वरम में वार्षिकोत्सव होता है जिसमें भगवान शिव और माँ पार्वती की प्रतिमाओं की शोभा यात्रा सोने या चांदी के वाहनों पर निकाली जाती है। रामेश्वर ज्योतिर्लिंग को सुसज्जित किया जाता है। उत्तराखंड से गंगोत्री का जल लाकर रामेश्वर ज्योतिर्लिंग को चढ़ाया जाता। है। इसका बड़ा ही महत्त्व है। शिवपुराण के कोटिरुद्रसंहिता के अनुसार यह कथा उस समय की है जब रावण सीता जी का हरण कर लंका ले गया था। तब सभी देवी की खोज में निकले थे। श्री राम जी अपनी वानर सेना के साथ दक्षिण के समुद्र तट पर पहुंचे थे। वही तट पर स्वयं भगवान राम ने शिव जी का ज्योतिर्लिंग स्थापित किया था। यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित है। यह चार धामों में से एक है। आईये इस कथा को विस्तार से जानते हैं। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग कथा जब श्री राम, लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना के साथ स...

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग

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आखिर क्यों कुंभकर्ण के बेटे ने चलाई              शिवलिंग पर तलवार,  आईये जानते है           भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की अद्भूत गाथा प्राचीनकाल में भीम नामक एक महाप्रतापी राक्षस था। वह कामरूप प्रदेश में अपनी मां के साथ रहता था। वह महाबली राक्षस, राक्षसराज रावण के छोटे भाई कुंभकर्ण का पुत्र था। लेकिन उसने अपने पिता को कभी देखा न था। उसके होश संभालने के पूर्व ही भगवान राम के द्वारा कुंभकर्ण का वध कर दिया गया था। जब वह युवावस्था को प्राप्त हुआ तब उसकी माता ने उससे सारी बातें बताईं। भगवान विष्णु के अवतार श्रीरामचंद्रजी द्वारा अपने पिता के वध की बात सुनकर वह महाबली राक्षस अत्यंत क्रुद्ध हो उठा। अब वह निरंतर भगवान श्री हरि के वध का उपाय सोचने लगा। उसने अपने अभीष्ट की प्राप्ति के लिए एक हजार वर्ष तक कठिन तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे लोक विजयी होने का वर दे दिया। अब तो वह राक्षस ब्रह्माजी के उस वर के प्रभाव से सारे प्राणियों को पीड़ित करने लगा। उसने देवलोक पर आक्रमण करके इंद्र आदि सारे देवताओं को वहां स...

इंदिरा एकादशी

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इंदिरा एकादशी से मिलेगी पितरों को मोक्ष की प्राप्ति  पितृपक्ष में आने वाले सबसे महत्वपूर्ण एकादशी इंदिरा एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है। इंदिरा एकादशी के दिन व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और इंदिरा एकादशी की कथा सुनने का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत करके मिलने वाले पुण्य से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत के पुण्य का दान पितरों को कर दिया जाए, तो उनको भी मोक्ष मिलता है। इस एकादशी का व्रत पूर्ण करने के लिए इंदिरा एकादशी की कथा सुनना आवश्यक माना जाता है। आइए जानते हैं कि इंदिरा एकादशी की कथा क्या है। इंदिरा एकादशी की व्रत कथा सतयुग में महिष्मति नाम का एक नगर था, जिसका राजा इंद्रसेन था। वह बहुत ही प्रतापी राजा था। वह अपनी प्रजा का भरण-पोषण संतान के समान करता था। उसकी प्रजा उसके शासन में सुखी थी। किसी को भी किसी चीज की कमी न थी। राजा इंद्रसेन भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था। एक दिन अचानक नारद मुनि का, राजा इंद्रसेन की सभा में आगमन हुआ। वे इंद्रसेन के पिता का संदेश लेकर वहां पहुंचे थे। उन्होंने राजा को वह संदेश दिया। उनके पिता ने कहा था कि पूर्व जन्म में किसी ...

बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

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बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इसलिए इस शिवलिंग को 'कामना लिंग' भी कहते हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है कि जहां-जहां महादेव साक्षत प्रकट हुए वहां ये स्थापित की गईं. इसी तरह पुराणों में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भी कथा है जो लंकापति रावण से जुड़ी है। बाबा बैजनाथ धाम की कथा भगवान शिव के भक्त रावण और बाबा बैजनाथ की कहानी बड़ी निराली है। पौराणिक कथा के अनुसार दशानन रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर तप कर रहा था। वह एक-एक करके अपने सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ा रहा था. 9 सिर चढ़ाने के बाद जब रावण 10वां सिर काटने वाला था तो भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और उससे वर मांगने को कहा। तब रावण ने 'कामना लिंग' को ही लंका ले जाने का वरदान मांग लिया। रावण के पास सोने की लंका के अलावा तीनों लोकों में शासन करने की शक्ति तो थी ही साथ ही उसने कई देवता, यक्ष और...

वैदिक घड़ी

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*वैदिक घड़ी* *देखिये आपकी घड़ी क्या कहती है* ◆ 12:00 बजने के स्थान पर आदित्या: लिखा हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं... अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु ◆ 1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है, इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है। एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति ◆ 2:00 बजने की स्थान पर अश्विनौ लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं। ◆ 3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं। सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण। ◆ 4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेदा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ◆ 5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं। अपान, समान, प्राण, उदान और व्यान ◆ 6:00 बजने के स्थान पर षड्र्सा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं। मधुर, अमल, लवण, कटु, तिक्त और कसाय ◆ 7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षय: लिखा हु...