श्री गजानन उत्सव

 गणेशजी आए हैं खुशियाँ लाए है

आइए जानते हैं गणेशजी के बारे में कुछ रोचक बातें

भगवान गणेश को भगवान शिव और माता पार्वती की दूसरी संतान मानी जाती है।शिवपुराण के अनुसार, भगवान गणेश को बनाने के लिए पार्वती के सहेलियां जया और विजया ने निर्णय लिया था। उन्होंने पार्वती को सुझाव दिया था कि वह नंदी और शिव भगवान के निर्देशों का पालन करें। इसलिए यहां एक ऎसा व्यक्ति होना चाहिए जो पार्वती के आदेशों का भी पालन करें। इसके बाद पार्वती ने अपने शरीर के मैल से भगवान गणेश को बनाया।

गणों के स्वामी होने के कारण ही इन्हें 'गणपति' कहते हैं।
हाथी जैसा मुंह होने की वजह से इनका नाम 'गजानन' है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, जब परशुराम कैलाश पर्वत पर शिव भगवान से मिलेने गए थे। वह ध्यान में थे तो भगवान गणेश जी ने उन्हे रोका तो परशुराम जी ने नाराज होकर गणेश पर कुल्हाड़ी से वार किया जो शिव भगवान द्वारा ही दी गई थी। जिसका वार कभी खाली नहीं जाता था। इस हमले के दौरान भगवान गणेश का एक दांत टूट गया इसलिए गणेश जी को एकदन्त के रूप में जाना जाता है।

हर युग में गणेश भगवान के अलग-अलग रूप की आराधना की गई है. गणेश पुराण के अनुसार, सतयुग में उनका दस भुजाओंवाला सिंह की सवारीवाला विनायक रूप, त्रेता युग में श्‍वेत वर्ण छह भुजाओंवाले मयूर की सवारी मयूरेश्‍वर रूप, द्वापर युग में चार भुजाओंवाले लाल वर्ण व मूषक की सवारीवाले गजानन, कलियुग में दो भुजाएं अश्‍व वाहन धूम्र वर्ण धूम्रकेतु रूप प्रचलित रहेगा.

इन्हें वरदान मिला है कि बिना इनकी पूजा के कोई भी पूजा और कोई भी कार्य पूरा नहीं होगा इसी कारण उन्हें 'आदिपूज्य' कहा जाता है।

भगवान शिव और पार्वती के पुत्र गणेश जी बुराईयों और बाधाओं का विनाश करने वाले भगवान हैं। भगवान गणेश की पूजा से विद्या, ज्ञान, बुद्धि और धन की प्राप्ति होती है। गणेश जी उन पांच प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, शिव और दुर्गा) में से एक है जिनकी मूर्ति पूजा पंचायतन पूजा के रूप में होती हैं।

भगवन गणेश की कुछ विशेष जानकारी

1.श्री गणेश को लाल व सिंदूरी रंग प्रिय है। 

2. दूर्वा के प्रति विशेष लगाव है। 

3. चूहा इनका वाहन है। बैठे रहना इनकी आदत है। 

4. लिखने में इनकी विशेषज्ञता है। पूर्व दिशा अच्छी लगती है। 

5. लाल रंग के पुष्प से शीघ्र खुश होते हैं। 

6. प्रथम स्मरण से कार्य को निर्विघ्न संपन्न करते हैं।  

7. दक्षिण दिशा की ओर मुंह करना पसंद नहीं है। 

8. चतुर्थी तिथि इनकी प्रिय तिथि है। 

9. स्वस्तिक इनका चिन्ह है। 

10. सिंदूर व शुद्ध घी की मालिश इनको प्रसन्न करती है। 

11.गृहस्थाश्रम के लिए ये आदर्श देवता हैं। कामना को शीघ्र पूर्ण कर देते हैं। 

भगवान गणेश की प्रतिमा घर अथवा कार्यालय में स्थापित करने और प्रतिदिन पूजा वन्दना करने से होने वाला लाभ और उनसे होने वाले फल जानते है 

* घर में गणेशजी का फोटो लगाते समय ध्यान दें कि फोटो मेें मोदक व चूहा ज़रूर हो. इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
* जीवन में शांति बनी रहे, इसके लिए स़फेद गणपति की पूजा-अर्चना करें.

* कामयाब व मशहूर होने के लिए पन्नावाले भगवान गणेश की आराधना करें.

* बच्चे की कामना के लिए बाल गणेश की पूजा करें.

* डर व शत्रुओं से बचने के लिए मूंगावाले गणेश भगवान की स्तुति करें.

* धन-वैभव के लिए चांदी के गणपति घर में रखें. साथ ही कमल पर बैठे गणेशजी की भी पूजा कर सकते हैं.

* परिवार में आपसी स्नेह, प्यार, सहयोग बना रहे, लड़ाई-झगड़े, कलह आदि न हो, इसके लिए चंदन के गणपति की पूजा करें.

* सिंदूरी रंग के गणेश भगवान की आराधना करने से घर के सभी कार्य निर्विघ्न रूप से होते हैं.

* घर के सेंटर में पूर्व दिशा में गणपतिजी को रखना शुभ होता है.

* मुख्यद्वार पर गणेशजी की दो मूर्ति लगाएं, जिनकी पीठ आपस में मिली हो. इससे सभी तरह के वास्तु-दोष दूर हो जाते हैं.

* घर में गणपतिजी की बैठी मुद्रा और शॉप-ऑफिस में खड़ी मुद्रा शुभदायक होती है.


घर अथवा कार्यालय में स्थापित गणपति मुर्ति की ओर ध्यान देंने वाली आवशक बातें 

* गणपति भगवान का मुंह दक्षिण दिशा की तरफ़ न हो.

* एक घर में 3 गणपति की पूजा न करें.

* घर-ऑफिस में गणपति रखते समय ध्यान दें कि इनका मुंह दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में न हो.

* गणेशजी की मूर्ति की स्थापना करते समय उनकी सूंड बाएं हाथ की ओर घूमी हुई हो.

नीचे दिये गये मन्त्रों का प्रतिदिन जाप करे 

गणेश गायत्री मंत्र ( सुख समृद्धि व बुद्धि विद्या प्राप्ति के लिए )

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।

गणेश कुबेर मंत्र ( धन वैभव प्राप्ति के लिए )

ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।


गणपति बप्प मौर्य
जय श्री गजानन। शिवशक्ति धाम 


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